ای که در دیر و حرم مست کرم میآیی
ای که در دیر و حرم مست کرم میآیی
دل چه دارد که درین غمکده کم میآیی
эй ки дар дир ва ҳарм маст-карм мӣ-ойай
дил ча дорад ки дарин ғамакада кам мӣ-ойай
جوهر ناز چه مقدار تری میچیند
که به حسرتکدهٔ دیدهٔ نم میآیی
ҷуҳар ноз ча мақадор тари мӣ-чинд
ки ба ҳасартакада дида нам мӣ-ойай
اینقدر سلسلهٔ ناز که دیدهست رسا؟
عمرها شد که به هر سو نگرم می آیی
айанқадар саласала ноз ки дида-ст рсо?
ъамараҳо шуд ки ба ҳар су нгарм мӣ ойай
صمدی لیک در این انجمن عجز نگاه
به چمن سازی آثار صنم می آیی
самади лик дар ин анаҷаман ъаҷаз нго
ба чаман сози осор санам мӣ ойай
چقدر لطف تو فریادرس بیبصریست
که به چشم همهکس دیر و حرم میآیی
чақадар латаф ту фариодарс-би-басари-ст
ки ба чашм ҳама-кас дир ва ҳарм мӣ-ойай
عقل و حس غیر تحیر چه ترازد اینجا
کز حدوث آینهپرداز قدم میآیی
ақл ва ҳас ғир таҳир ча тарозд инҷо
каз ҳадус оина-пардоз қадам мӣ-ойай
عرض تنزیه به تشبیه نمیآید راست
سحر کاریست که معنی به رقم میآیی
ъарз таназиа ба ташабиа нами-ойд рост
саҳар корист ки маъани ба рақам мӣ-ойай
فقر نازد که به تجرید نظر دوختهای
جاه بالد که به سامان حشم میآیی
фақар нозд ки ба таҷарид назар духта-эй
ҷо болд ки ба сомон ҳашм мӣ-ойай
ای نفس آمد و رفت هوست داغم کرد
میروی سوی عدم یا ز عدم میآیی
эй нафас омад ва рафт ҳуст доғам-кард
мӣ-равай савай ъадам йо з ъадам мӣ-ойай
چشم تا بستهای، آفاق سواد مژه است
صد شق خامه ز یک نقطه به هم میآیی
чашм то баста-эй, офоқ савод мажа аст
сад шақ хома з як нақата ба ҳам мӣ-ойай
چینت از دامن آرام به هرجا گل کرد
ذره تا مهر به آرایش رم میآیی
чинат аз доман ором ба ҳараҷо гул-кард
зара то маҳар ба оройаш рм мӣ-ойай
انتظار تو به هر رهگذرم دارد فرش
هر کجا پای نهی پا به سرم میآیی
анатазор ту ба ҳар раҳагазарм дорад фараш
ҳаракаҷо пой наҳи по ба сарам мӣ-ойай
کم آرایش تسلیم نگیری زنهار
ابروی نازی اگر مایل خم میآیی
кам оройаш тасалим нгири занаҳор
абаравай нози агар мойал хам мӣ-ойай
چه ضرور است کشی رنج وداعم بیدل
میروم من به مقامی که تو هم میآیی
ча зарур аст-каши ранҷ вадоъам бидел
мӣ-рум ман ба мақоми-ки ту ҳам мӣ-ойай
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- آینه
- سطح بازتابنده؛ در شعر نماد خودشناسی، صفا و جلوه است.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- گل
- شکوفهٔ خوشبو؛ نشانهٔ زیبایی، بهار و معشوق.
- پا
- عضوِ راهرفتن؛ نمادِ گام در راهِ طلب و سلوک.
- دامن
- کنارهٔ جامه؛ نمادِ پاکی، پناه و دستآویز.
- ناز
- کرشمه و دلربایی؛ جلوهگریِ معشوق در برابرِ نیاز.
- پای
- عضوِ ایستادن و رفتن؛ نمادِ ثبات و گام در راه.
- چمن
- سبزهزارِ خرّم؛ نمادِ بهار، باغ و جلوهگاهِ حسن.
- دیده
- چشمِ بیننده؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و دیدارِ یار.
- عجز
- ناتوانی و درماندگی؛ فروتنیِ بنده در برابرِ حق.
- عدم
- نیستی؛ نبودن در برابر هستی و گاه مرتبه پیش از ظهور.
- عرض
- ویژگی ناپایدار شیء؛ در برابر جوهر و ذات.
- مژه
- موی پلکِ چشم؛ تیرِ نگاه و ابزارِ گریه و خونِ دل.
- نظر
- نگاه و دیدن؛ توجهِ معشوق یا بصیرتِ باطن.
- سحر
- سپیدهدم؛ زمان گشایش، دعا، بیداری و تغییر حال.