دل چو شد روشن جهان هم مشرب او میشود
دل چو شد روشن جهان هم مشرب او میشود
شش جهت در خانهٔ آیینه یکرو میشود
дил чу шуд рушан ҷаҳон ҳам машараб ав мӣ-шуд
шаш ҷаҳат дар хона оина як-ру мӣ-шуд
جوهر اخلاق نقصان میکشد از انفعال
برگ گر هر گه در آب افتاد کمبو میشود
ҷуҳар ахалоқ нақасон мӣ-кашад аз анафаъол
бараг гар ҳар га дар об афтод кам-бу мӣ-шуд
هرچه گفتیم از حیا دادیم بر باد عرق
حرف ما بیحاصلان سبز از لب جو میشود
ҳарача-гафтим аз ҳио додим бар бод ъарақ
ҳарф мо биҳосалон сабаз аз лаб ҷу мӣ-шуд
درکمین هر وقاری خفتی خوابیده است
سنگ این کهسار-آخر بیترازو میشود
даракамин ҳар вқори хафти хобида аст
санг ин каҳасор-охар бе-тарозу мӣ-шуд
فکر خویشم رهزن است از باغ و بستانم مپرس
گر همه بر چرختازم سیر زانو میشود
факар хойашм раҳазн аст аз боғ ва бастонам мапарс
гар ҳама бар чарх-тозм сир зону мӣ-шуд
شکر احسان در زمین بیکسی بیریشه نیست
سایهٔ دستی که افتد بر سرم مو میشود
шакар аҳасон дар замин бе-каси бе-риша нест
сойа дасти-ки афатад бар сарам му мӣ-шуд
بزم تجدید است اینجا فرصت تحقیق کو
من منی دارم که تا وا میرسم او میشود
базм таҷадид аст инҷо фарсат таҳақиқ ку
ман мани дорм-ки то во мӣ-расам ав мӣ-шуд
قید هستی را دو روزی مغتنم باید شمرد
ای ز فرصت بیخبر صیادت آهو میشود
қид ҳастӣ ро ду рузи мағатанам бойд шмард
эй з фарсат бихабар сиодат оҳу мӣ-шуд
در خموشی لفظ ومعنی قابل تفریق نیست
حرف بیرنگ ازگشاد لب دوپهلو میشود
дар хамуши лафаз вамаъани қобал тафариқ нест
ҳарф биранг азагашод лаб дупаҳалу мӣ-шуд
از تکلف نیز باید بر در اخلاق زد
این حنای پنجه ننگ دست و بازو میشود
аз такалаф низ бойд бар дар ахалоқ зд
ин ҳаной панҷа нанг даст ва бозу мӣ-шуд
ناز بیکاری نیاز غیرت مردی مکن
هرچه میآری به تکرار عمل خو میشود
ноз бикори ниоз ғирт марди макан
ҳарача мӣ-ори ба такарор ъамал хо мӣ-шуд
از تواضع نگذری گر آرزوی عزتیست
بیدل این وضعت به چشم هرکس ابرو میشود
аз тавозаъ нагазари гар оразавай ъазати-ст
бидел ин вазаъат ба чашм ҳаракас абару мӣ-шуд
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- آیینه
- شیشهٔ بازتابدهنده؛ نمادِ صفای دل و تجلّیِ حق.
- آب
- مایعِ زندگانی؛ نمادِ روانی، صفا و گاه آبرو.
- دست
- اندامِ گرفتن؛ نمادِ قدرت، بخشش و تصرف.
- هستی
- وجود و بودن؛ در برابر عدم و نیستی.
- جهان
- گیتی و دنیا؛ سرای گذرا و فریبندهٔ هستی.
- ناز
- کرشمه و دلربایی؛ جلوهگریِ معشوق در برابرِ نیاز.
- سنگ
- تختهسنگِ سخت؛ نمادِ سختی، جفا و گاه مستی.
- سایه
- اثر تاریک در برابر نور؛ کنایه از ناپایداری، پیروی یا وجود کمرنگ.
- لب
- کنارهٔ دهان؛ نمادِ سخن، بوسه و حیاتِ معشوق.
- خانه
- سرپناهِ زیست؛ نمادِ دل، تن یا قفسِ هستی.
- عرق
- تراوشِ پوست؛ نمادِ شرم، خجلت و لطافتِ رخسار.
- فرصت
- مجال کوتاه انجام کار؛ در شعر غالبا لحظه گذرای عمر.
- جوهر
- ذات و بنیاد شیء؛ چیزی که قائم به خود دانسته میشود.
- سیر
- گشت و سفر؛ سلوک و سیرِ معنویِ جان در راهِ حق.