قامت خمکز حیا سوی زمین رو میکند
قامت خمکز حیا سوی زمین رو میکند
فهم میخواهد اشارتهای ابرو میکند
қомат хам-каз ҳио савай замин ру мекунад
фаҳам мӣ-хоҳад ашоратаҳой абару мекунад
هر کجا باشیم در اندوه از خود رفتنیم
شمع ما سر بر هوا هم، سیر زانو می کند
ҳар каҷо бошим дар андуа аз худ рафтаним
шамъ мо сар бар ҳаво ҳам,сир зону мӣ канд
سایه و تمثال راکم نیستگر سنجی به باد
شرم خفت سنگ ما را بیترازو میکند
сойа ва тамасол рокам нест-гар санҷи ба бод
шарм хафт санг мо ро бе-тарозу мекунад
چشم بند سحر الفت را نمیباشد علاج
دل گرفتار خود است و یاد گیسو میکند
чашм банд саҳар алафт ро нами-бошад ъалоҷ
дил гарфатор худ аст ва йод гису мекунад
این چنین کز ناتوانیها شکستم دادهاند
گر رسد چینی به یادم نوحه بر مو میکند
ин чанин каз нотавониҳо шакастам дода-анд
гар расад чини ба йодам нуҳа бар му мекунад
بسکه یاران در همین ویرانهها گم گشتهاند
میچکد اشکم ز چشم و خاک را بو میکند
басака йорон дар ҳамин вайрона-ҳо гам гашта-анд
мӣ-чакад ашакам з чашм ва хок ро бу мекунад
روز بازار تعین آنقدر مالوف نیست
خلق چون شب شد دکان در چشم آهو میکند
рӯз бозор таъин онақадар молуф нест
халқ чун шаб шуд дакон дар чашм оҳу мекунад
ناتوانی هم به جایی میرسد، مردانه باش
سایه کار قاصد مطلب به پهلو میکند
нотавони ҳам ба ҷойай мӣ-расад, мардона бош
сойа кор қосад маталаб ба паҳалу мекунад
با توکّل کس نمیپرداخت گر میداشت شرم
دستگاه نعمت بیخواست بدخو میکند
бо тукал-кас нами-пардохт гар мӣ-дошт шарм
дастаго наъамат бе-хост бадахо мекунад
طبع ظالم در ریاضت مایل اصلاح نیست
تیغ را تدبیر خونریزی تنکرو میکند
табаъ золм дар риозат мойал асалоҳ нест
тиғ ро тадабир хонаризи танак-ру мекунад
حالت از کف میرود در فکر مستقبل مرو
این خیال دورگرد آخر تو را، او میکند
ҳолат аз каф мӣ-руд дар факар мастақабал мару
ин хаёл дурагард охар ту ро, ав мекунад
تاکجا بیدل ز گردون خجلتم باید کشید
اینکمان سخت، پر زورم به بازو میکند
токаҷо бидел з гардун хаҷалатам бойд кашид
ин-камон сахт, пур зурм ба бозу мекунад
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- خیال
- صورت ذهنی و وهم؛ جهان تصور در برابر حضور عینی.
- سنگ
- تختهسنگِ سخت؛ نمادِ سختی، جفا و گاه مستی.
- سایه
- اثر تاریک در برابر نور؛ کنایه از ناپایداری، پیروی یا وجود کمرنگ.
- شرم
- حیا و آزرم؛ پروای درونی در برابرِ معشوق و حق.
- سحر
- سپیدهدم؛ زمان گشایش، دعا، بیداری و تغییر حال.
- یاد
- بهخاطرآوردن؛ حضورِ معشوق در دل و ذکرِ پیوسته.
- تیغ
- شمشیر و لبهٔ تیز؛ نمادِ قهرِ معشوق و جراحتِ عشق.
- سیر
- گشت و سفر؛ سلوک و سیرِ معنویِ جان در راهِ حق.
- خم
- خمیدگی یا خمِ شراب؛ منبعِ مستی و فیضِ معنوی.
- خلق
- مردمان یا خوی و سرشت؛ جهانِ کثرت در برابرِ تنهایی.