ز رهِ هوس، به تو کی رسم؟ نفسی ز خود نرمیده من
ز رهِ هوس، به تو کی رسم؟ نفسی ز خود نرمیده من
همه حیرتم! به کجا روم؟ به رهت سری نکشیده من
з ра ҳус, ба ту ки расам? нафаси з худ нармида ман
ҳама ҳиратам! ба-каҷо рум? ба раҳат сари накашида ман
به چه برگ، سازِ طرب کنم؟ ز چه جام نشئه طلب کنم؟
گلِ باغِ شعلهْ نچیده من، مِیِ داغِ دلْ نچشیده من
ба ча бараг, соз тараб-канам? з ча ҷом нашиа талаб-канам?
гул боғ шаъала начида ман, мӣ доғ дил начашида ман
چو گل آنکه نسخهٔ صد چمن، ز نقابِ جلوه گشوده: تو
چو می آنکه عشرتِ عالمی ز گدازِ خود طلبیده: من
чу гул онака насаха сад чаман, з нқоби ҷалуа-гашуда: ту
чу мӣ онака ъашарти ъолми з гадози худ талабида: ман
چه بلا ستمکش غیرتم، چقدَر نشانهٔ حیرتم
که شهیدِ خنجر نازِ تو، شده عالمی و تپیده من
ча бало сатамакаш ғиратам, чақадар нашона ҳиратам
ки шаҳиди ханҷар ноз ту, шада ъолми ва тапида ман
تو به محفلی ننموده رو که ز تاب شعلهٔ غیرتش
همه اشک گشته به رنگِ شمع و ز چشم خود نچکیده من
ту ба маҳафали нанамуда ру ки з тоб шаъала ғираташ
ҳама ашак-гашта ба ранг шамъ ва з чашм худ начакида ман
میِ جام ناز و نیازها به خمار اگر نکشد، چرا
ز سر جفا نگذشته تو، ز در وفا نرمیده من
мӣ ҷом ноз ва ниозаҳо ба хамор агар накашад, чаро
з сар ҷафо нагазашта ту, з дар вафо нармида ман
چو نگاهِ گرم، به هر طرف، که گذشته محملِ نازِ تو
چو دلِ گداخته از پیات، به رکابِ اشک دویده من
чу нго гарм, ба ҳар тарф, ки-газашта маҳамал ноз ту
чу дил гадохта аз пи-ат, ба ракоби ашак давайда ман
تو و صد چمن طرب نمو، من و شبنمی نگه آبرو
به بهار عالم رنگ و بو، همه جلوه: تو، همه دیده: من
ту ва сад чаман тараб наму, ман ва шабанами нга-обару
ба бҳор олам ранг ва бу, ҳама ҷалуа: ту, ҳама дида: ман
نه جنونِ سینه دریدنی، نه فنون مشقْ تپیدنی
به سوادِ درد تو کی رسم؟ الفی ز ناله کشیده من
на ҷанун сина даридани, на фанун машақ тапидани
ба савод дард ту ки расам? алафи з нола-кашида ман
چو سحر نیامده در نظر، رم فرصت نفَس آنقدر
که برم بر آبِ شکفتگی به طراوتِ گلِ چیده من
чу саҳар ниомада дар назар,рм фарсат нафас онақадар
ки барм бар об шакафтаги ба таровати гул чида ман
بهکدام نغمهٔ دل گسل، ز نواکشان نشوم خجل
چو جرس به غیرِ شکست دل، سخنی ز خود نشنیده من
ба-кадом нағама дил гасал, з навокашон нашум хаҷал
чу ҷарс ба ғир шакаст дил, сахани з худ нашанида ман
منِ بیدل و غم غفلتی که ز چشمبندِ فسونِ دل
همه جا ز جلوهٔ من پر است و به هیچ جا نرسیده من
ман бидел ва ғам ғафалати-ки з чашмабанди фасуни дил
ҳама ҷо з ҷалуа ман пур аст ва ба ҳич ҷо нарсида ман
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- گل
- شکوفهٔ خوشبو؛ نشانهٔ زیبایی، بهار و معشوق.
- آب
- مایعِ زندگانی؛ نمادِ روانی، صفا و گاه آبرو.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- عالم
- جهانِ هستی؛ پهنهٔ آفرینش و جلوهگاهِ حق.
- ناله
- فریادِ دردمندانه؛ آوای سوز و شکوهٔ عاشق.
- شکست
- درهمشکستگی؛ نمادِ نیستی و فروریختنِ خودیِ عاشق.
- جنون
- دیوانگی؛ شیداییِ عاشقانه و رهاییِ از عقل.
- ساز
- آلتِ نوازندگی؛ نمادِ همآهنگی و نوای درون.
- ناز
- کرشمه و دلربایی؛ جلوهگریِ معشوق در برابرِ نیاز.
- داغ
- نشان سوختگی یا زخم؛ کنایه از اندوه، عشق و حسرت.
- اشک
- قطرهٔ چشم؛ نشانهٔ گریه، شوق یا اندوهِ عاشقانه.