مپسند جز به رهن تغافل پیام ما
مپسند جز به رهن تغافل پیام ما
لعل ترا نگین نگرفتهست نام ما
мапасанд ҷазаба раҳан тағофал пиом мо
лаъал таро нгин нагарафта-ст ном мо
پوشیده نیست تیرگی بخت عاشقان
آیینهٔ چراغ به دست است شام ما
пушида нест тираги бахт ъошақон
оина чароғ ба даст аст шом мо
کس با دلگرفته چه صید آرزو کند
این غنچه وا شودکهگل افتد به دام ما
кас бо дил-гарфата ча сид орзу канд
ин ғанача во шудака-гул афатад ба дом мо
صد رنگ خون به جیب تأمل نهفتهایم
ضبط نفس چنو زخم دلست التیام ما
сад ранг хон ба ҷиб томал наҳафта-айам
забат нафас чану захам дил-ст алатиом мо
همواری طبیعت پرکار روشن است
مستی نخوانده استکس از خط جام ما
ҳамавори табиъат паракор рушан аст
масти нхонда аст-кас аз хт ҷом мо
در مکتب تسلسل عقلت نمیرسد
صد داستان به یک سخن ناتمام ما
дар мактаб тасаласал ъақалат нами-расад
сад достон ба як сахан нотамом мо
معیار چارسوی دو عالم گرفتهایم
یک جنس نیست قابل سودای خام ما
маъиор чорасавай ду олам гарфата-айам
як ҷанас нест қобал судой хом мо
گاهی دو همعنان سحر میتوان گذشت
رنگ شکسته میکشد امشب زمام ما
гоҳи ду ҳамаъанон саҳар мӣ-тавон газашт
ранг шакаста мӣ-кашад амашаб змом мо
چون سبحه اینقدر به چه امید میدود
دل در رکاب اشک چکیدن خرام ما
чун сабҳа айанқадар ба ча амид мӣ-дуд
дил дар ракоб ашак чакидан харом мо
دیگر به الفت که توان چشم دوختن
در عالم رمی که نفس نیست رام ما
дигар ба алафт-ки тавон чашм духатан
дар олам рми-ки нафас нест ром мо
کو انفعال تا حق هستی اداکنیم
چون شمع بسته برعرقی چند وام ما
ку анафаъол то ҳақ ҳастӣ адоканим
чун шамъ баста бараъарақи чанд вом мо
بیدل چو نقش پا زبنای ادب مپرس
پر سرنگون فتاده بلندی ز بام ما
бидел чу нақш по забаной адаб мапарс
пур сарнагун фтода баланди з бом мо
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- آیینه
- شیشهٔ بازتابدهنده؛ نمادِ صفای دل و تجلّیِ حق.
- گل
- شکوفهٔ خوشبو؛ نشانهٔ زیبایی، بهار و معشوق.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- پا
- عضوِ راهرفتن؛ نمادِ گام در راهِ طلب و سلوک.
- دست
- اندامِ گرفتن؛ نمادِ قدرت، بخشش و تصرف.
- عالم
- جهانِ هستی؛ پهنهٔ آفرینش و جلوهگاهِ حق.
- هستی
- وجود و بودن؛ در برابر عدم و نیستی.
- نقش
- تصویر و اثر؛ گاه صورت ظاهری در برابر حقیقت.
- خون
- مایعِ سرخِ تن؛ نمادِ درد، شور و جگرسوزیِ عشق.
- اشک
- قطرهٔ چشم؛ نشانهٔ گریه، شوق یا اندوهِ عاشقانه.
- خط
- موی نورُستهٔ گونه؛ نمادِ زیباییِ نوخیزِ معشوق.