چو دولت درش بر خسان واشود
چو دولت درش بر خسان واشود
پر آرد برون مور و عنقا شود
чу дулат дараш бар хасон вошуд
пур орд барун мур ва ъанқо шуд
بپرهیز از اقبال دون فطرتان
تنکروست سنگی که مینا شود
бапараҳиз аз ақабол дун-фтартон
танак-руст санги ки мино шуд
سبکمغز شایان اسرار نیست
خس از دوری شعله رسوا شود
сабак-мағаз шойон асарор нест
хас аз дури шаъала расаво шуд
چو گردد اقبال علم و عمل
ورق چیست، خط هم چلیپا شود
чу гардад ақабол ъалм ва ъамал
варақ чист, хт ҳам чалипо шуд
بر ارباب همت دنائت مبند
فلک خاک گردد که سرپا شود
бар арабоб ҳамат данойт мабанд
фалак хок гардад ки сарапо шуд
معمای آفاق نتوان شکافت
مگر اسم عنقا مسما شود
маъамой офоқ натавон шакофт
магар асам ъанқо масамо шуд
ز اسباب نتوان به دل زد گره
بروبید تا خانه صحرا شود
з асабоб натавон ба дил зд гара
барубид то хона саҳаро шуд
نگین میتراشد معمای سنگ
که شاید به نام کسی واشود
нгин мӣ-тарошад маъамой санг
ки шойд ба ном-каси вошуд
به صد خامشی باز دارد سخن
اگریک دمش در دلی جا شود
ба сад хомаши боз дорад сахан
агарик дамаш дар дали ҷо шуд
بناگوش دلدارم آمد به یاد
کنم ناله تا صبح گویا شود
баногуш далдорм омад ба йод
канам нола то субҳ-гавайо шуд
زکیفیت نسبت آن دهن
عدم تا بگویم من وما شود
закифит насабат он даҳан
ъадам то багавайам ман вамо шуд
در ین دشت و در گردی از غیر نیست
ترا گر نجویم که پیدا شود
дар йан дашт ва дар гарди аз ғир нест
таро гар наҷавайам ки пидо шуд
به هرجا تو باشی زبانها یکیست
نه امروز دی شد نه فردا شود
ба ҳараҷо ту боши забонаҳо йкист
на амаруз ди шуд на фардо шуд
جهان چشم نگشاید از خواب ناز
اگر بیدل افسانه انشا شود
ҷаҳон чашм нагашойд аз хоб ноз
агар бидел афасона анашо шуд
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- جهان
- گیتی و دنیا؛ سرای گذرا و فریبندهٔ هستی.
- ناله
- فریادِ دردمندانه؛ آوای سوز و شکوهٔ عاشق.
- صبح
- آغاز روشنایی پس از شب؛ نشانه امید، گشودگی یا بیداری.
- ناز
- کرشمه و دلربایی؛ جلوهگریِ معشوق در برابرِ نیاز.
- سنگ
- تختهسنگِ سخت؛ نمادِ سختی، جفا و گاه مستی.
- خانه
- سرپناهِ زیست؛ نمادِ دل، تن یا قفسِ هستی.
- خط
- موی نورُستهٔ گونه؛ نمادِ زیباییِ نوخیزِ معشوق.
- عدم
- نیستی؛ نبودن در برابر هستی و گاه مرتبه پیش از ظهور.
- یاد
- بهخاطرآوردن؛ حضورِ معشوق در دل و ذکرِ پیوسته.
- خواب
- خفتن و رؤیا؛ نشانهٔ غفلت در برابرِ بیداریِ دل.
- شعله
- زبانه آتش؛ نماد شور، گدازِ عشق و فنای ناپایدار.
- پیدا
- آشکار و نمایان؛ ظهورِ حق در برابرِ نهان و پنهان.