شمع بزمت چه قدم بردارد
شمع بزمت چه قدم بردارد
پای ما آبلهٔ سر دارد
шамъ базмат ча қадам бардорд
пой мо обала сар дорад
گل این باغ گریبان چاکست
خنده از زخم که باور دارد
гул ин боғ гарибон чок-ст
ханда аз захам ки бовар дорад
در تکلیف تبسم مگشای
دهن تنگ تو شکر دارد
дар такалиф табасам магашой
даҳан танг ту шакар дорад
خاک سامان غبارش کم نیست
نیستی نیز کر و فر دارد
хок сомон ғабораш кам нест
нисти низ кар ва фар дорад
عالمی چشم ز ما روشن کرد
رنگ ما خاصیت زر دارد
ъолми чашм з мо рушан-кард
ранг мо хосит зар дорад
کس چه خواند رقم پیشانی
صفحهٔ ما خط مسطر دارد
кас ча хонд рақам пишони
сафаҳа мо хт мастар дорад
سر هر فکر گریبانخواه است
موج هم تکمهٔ گوهر دارد
сар ҳар факар гарибон-хо аст
мавҷ ҳам такама-гуҳар дорад
بیخریدار چه ارزد گوهر
دل همان است که دلبر دارد
бе-харидор ча аразд гуҳар
дил ҳамон аст ки далабар дорад
تا فسردی ز نظرها رفتی
رنگ پرواز ته پر دارد
то фасарди з назараҳо рафти
ранг паравоз та пур дорад
لب بهم آر و حلاوتها کن
خامشی قند مکرر دارد
лаб баҳам ор ва ҳаловатаҳо кан
хомаши қанд макарар дорад
یک نفس قطع دو عالم کردم
دم این تیغ چه جوهر دارد
як нафас қатаъ ду олам кардам
дам ин тиғ ча ҷуҳар дорад
سرگران میگذرد نرگس یار
مزد چشمی که مژه بردارد
сарагарон мӣ-газард нарагас йор
мазд чашми-ки мажа бардорд
تا دماغ است، هوس بال گشاست
سر هر بام کبوتر دارد
то дамоғ аст, ҳус бол-гашост
сар ҳар бом кабутар дорад
بیدل این صورت و شکل آنهمه نیست
آدمی معنی دیگر دارد
бидел ин сурт вашакал онаҳама нест
одами маъани дигар дорад
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- گل
- شکوفهٔ خوشبو؛ نشانهٔ زیبایی، بهار و معشوق.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- عالم
- جهانِ هستی؛ پهنهٔ آفرینش و جلوهگاهِ حق.
- موج
- برآمدگی آب؛ در شعر نشانه جنبش، اضطراب و ناپایداری.
- هوس
- آرزوی زودگذر؛ میلِ نفسانی در برابرِ عشقِ راستین.
- بال
- پرِ پرواز؛ نمادِ اوجگرفتن و رهاییِ روح.
- لب
- کنارهٔ دهان؛ نمادِ سخن، بوسه و حیاتِ معشوق.
- پرواز
- اوجگرفتن در هوا؛ نمادِ رهاییِ روح و آرزو.
- خط
- موی نورُستهٔ گونه؛ نمادِ زیباییِ نوخیزِ معشوق.