هرجا خرام ناز تو تمکین عیان کند
هرجا خرام ناز تو تمکین عیان کند
حیرت در آب آینه کشتی روان کند
ҳараҷо харом ноз ту тамакин ъион-канд
ҳайрат дар об оина кашти равон канд
زخمی که خندد از دم تیغ تبسمت
خون چکیده را چمن زعفران کند
захами ки хандад аз дам тиғ табасамат
хон чакида ро чаман заъафарон канд
چشمت به محفلی که تغافل کند بلند
نی هم به میل سرمه نیاز فغان کند
чашмат ба маҳафали ки тағофал канд баланд
ни ҳам ба мил сарма ниоз фағон канд
از فرصت گذشته رسیدن گذشته گیر
رنگ پریده در چه بهار آشیان کند؟
аз фарсат газашта рсидан газашта гир
ранг парида дар ча бҳор ошион канд?
خاموش باش بر در دل ورنه بیادب
هر دم زدن یک آینهوارت زیان کند
хомуш бош бар дар дил варна бе-адаб
ҳар дам задан як оина-ворт зион-канд
از فعل زشت دشمن آسایش خودیم
ما را مگر به خویش حیا مهربان کند
аз фаъал зашт дашман осойаш ходим
мо ро магар ба хеш ҳио маҳарабон канд
آن شعله طینتم که پی طعمهٔ گداز
مغزم چو شمع پرورش استخوان کند
он шаъала тинатам ки пи таъама гадоз
мағазм чу шамъ парураш асатахон канд
تغییر پهلویم ستم است از هجوم درد
ترسم که بوریای مرا نیستان کند
тағийр паҳалавайам сатам аст аз ҳаҷум дард
тарсам ки буриой маро нистон канд
در خاک من غبار فنا نیست پرفشان
خواب عدم کجا مژهام را گران کند
дар хок ман ғубор фано нест парфашон
хоб ъадам каҷо мажа-ам ро гарон канд
بسمل صفت به سکته رسانیدهام ورق
سطری ز خون مگر سبقم را روان کند
басамал сафт ба сакта рсонида-ам варақ
сатари з хон магар сабақам ро равон канд
باور نداشتم که غبار مرا چو صبح
دامان چیده تا به فلک نردبان کند
бовар ндошатам ки ғубор маро чу субҳ
домон чида то ба фалак нардабон канд
تمثال من چو صورت عنقا همین صداست
چیزی نیام که آینهام امتحان کند
тамасол ман чу сурт ъанқо ҳамин садост
чизи ни-ам ки оина-ам аматаҳон канд
ای آینه عیوب مثالم به رو میار
بگذار تا عرق ته آبم نهان کند
эй оина ъиваб масолм ба ру миор
багазор то ъарақ та обам наҳон канд
بیدل مخوان فسانهٔ بخت سیاه من
کافاق را مباد چو شب سرمه دان کند
бидел махон фасона бахт сио ман
кофоқ ро мабод чу шаб сарма дон канд
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- آینه
- سطح بازتابنده؛ در شعر نماد خودشناسی، صفا و جلوه است.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- آب
- مایعِ زندگانی؛ نمادِ روانی، صفا و گاه آبرو.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- غبار
- گرد و خاک؛ نشانه محوی، فروتنی، ناپایداری یا حجاب دیدن.
- خون
- مایعِ سرخِ تن؛ نمادِ درد، شور و جگرسوزیِ عشق.
- صبح
- آغاز روشنایی پس از شب؛ نشانه امید، گشودگی یا بیداری.
- ناز
- کرشمه و دلربایی؛ جلوهگریِ معشوق در برابرِ نیاز.
- بهار
- فصلِ شکوفایی؛ نمادِ جوانی، تازگی و جلوهٔ حسن.
- حیرت
- سرگشتگی آگاهانه در برابر حقیقتی که فهم عادی از آن بازمیماند.
- چمن
- سبزهزارِ خرّم؛ نمادِ بهار، باغ و جلوهگاهِ حسن.
- عرق
- تراوشِ پوست؛ نمادِ شرم، خجلت و لطافتِ رخسار.
- عدم
- نیستی؛ نبودن در برابر هستی و گاه مرتبه پیش از ظهور.
- دم
- نفس یا لحظه؛ واحدی بسیار کوتاه از زمان و زندگی.