تا چند به عیب من وما چشمگشودن
تا چند به عیب من وما چشمگشودن
آیینهٔ ما آب شد از شرم نمودن
то чанд ба ъиб ман вамо чашм-гашудан
оина мо об шуд аз шарм намудан
مانند شرر دانهٔ بیحاصل ما را
نا کاشته دیدند سزاوار درودن
монанд шарар дона биҳосал мо ро
но кошта диданд сазовор дарудан
زین بیش که کاهیدی از اسباب تعین
ای صفر هوس بر تو چه خواهند فزودن
зин биш ки-коҳиди аз асабоб таъин
эй сафар ҳус бар ту ча хоҳанд фазудан
جمعیت دل وقف مقیم پس زانوست
باید به تامل مژهای چند غنودن
ҷамаъит дил вақаф мақим пас зонуст
бойд ба томал мажа-эй чанд ғанудан
نا صافی دل بیخبر از وهم و گمان بود
تمثال بر آیینه ما بست زدودن
но софи дил бихабар аз ваҳм ва гамон буд
тамасол бар оина мо баст здудан
علم و عملی چند که افسانهٔ وهم است
میجوشد ازین پرده چو گفتن ز شنودن
ъалм ва ъамали чанд ки-афасона ваҳм аст
мӣ-ҷушад азин парда-чу гафтан з шанудан
ما را به تصرفکدهٔ عالم اسباب
دستیست که باید چو نفس بر همه سودن
мо ро ба тасарфакада олам асабоб
дасти-ст ки бойд чу нафас бар ҳама судан
خمیازه غنیمت شمرد ذوق وصالم
چشمم به تو وا میکند آغوش گشودن
хамиоза ғанимат шмард зуқ васолм
чашмам ба ту во мекунад оғуш гашудан
ما خاک نشینان چمن عیش دوامیم
گل از سر تسلیم محالست ربودن
мо хок нашинон чаман ъиш давомим
гул аз сар тасалим маҳоласт рабудан
جز عجز ز پیدایی ما پردهگشا نیست
انداز خمی هست در ابروی نمودن
ҷуз ъаҷаз з пидойай мо парда-гашо нест
андоз хами ҳаст дар абаравай намудан
بیدل رم فرصت سرو برگ نفس توست
جایی که تو باشی نتوان آنهمه بودن
бидел-рм фарсат сару бараг нафас-туст
ҷойай-ки ту боши натавон онаҳама будан
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- آیینه
- شیشهٔ بازتابدهنده؛ نمادِ صفای دل و تجلّیِ حق.
- گل
- شکوفهٔ خوشبو؛ نشانهٔ زیبایی، بهار و معشوق.
- آب
- مایعِ زندگانی؛ نمادِ روانی، صفا و گاه آبرو.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- عالم
- جهانِ هستی؛ پهنهٔ آفرینش و جلوهگاهِ حق.
- هوس
- آرزوی زودگذر؛ میلِ نفسانی در برابرِ عشقِ راستین.
- چمن
- سبزهزارِ خرّم؛ نمادِ بهار، باغ و جلوهگاهِ حسن.
- وهم
- پندار ناپایدار؛ ادراکی که یقین و حقیقت کامل نیست.
- عجز
- ناتوانی و درماندگی؛ فروتنیِ بنده در برابرِ حق.
- شرم
- حیا و آزرم؛ پروای درونی در برابرِ معشوق و حق.
- مژه
- موی پلکِ چشم؛ تیرِ نگاه و ابزارِ گریه و خونِ دل.
- فرصت
- مجال کوتاه انجام کار؛ در شعر غالبا لحظه گذرای عمر.