از شوخی فضولی ما داشت عار وصل
از شوخی فضولی ما داشت عار وصل
آخرکنارکرد ز ننگ کنار وصل
аз шухи фазули мо дошт ъор васал
охараканоракард з нанг канор васал
چشمی به خود گشودهام و رفتهام ز خویش
ممنون فرصتم به یک آغوش وار وصل
чашми ба худ гашуда-ам ва рафта-ам з хеш
маманун фарсатам ба як оғуш вор васал
قاصد نوید وعدهٔ دلدار میدهد
ای آرزو بهار شو ای انتظار وصل
қосад навайд ваъада далдор мӣ-даҳад
эй орзу бҳор шу эй анатазор васал
رنج دویی نبرد ز ما سعی اتحاد
مردیم در فراق و نیامد به کار وصل
ранҷ давайай набард з мо саъи атаҳод
мардим дар фароқ ва ниомад ба кор васал
مژگان صفت موافقت خلق حیرتست
اینجا به خواب نیز غنیمت شمار وصل
мажагон сафт мавофақат халқ ҳиртаст
инҷо ба хоб низ ғанимат шмор васал
جز فکر عیش باعث اندوه هیچ نیست
هجران کجاست تا نکند خارخار وصل
ҷуз факар ъиш боъас андуа ҳич нест
ҳаҷарон каҷост то наканд хорхор васал
انجام سور بدتر از آغاز ماتم است
ای قدردان امن مکن اختیار وصل
анҷом сур бадатар аз оғоз мотам аст
эй қадардон аман макан ахтиор васал
چندین مراد جام تمنا به سنگ زد
یک شیشه گو به طاق تغافل گذار وصل
чандин марод ҷом тамано ба санг зд
як шиша гу ба тоқ тағофал газор васал
با نام محض صلح کن از ربط دوستان
واو است و صاد و لام درین روزگار وصل
бо ном маҳаз салаҳ кан аз рабат дустон
вов аст ва сод ва лом дарин рузагор васал
خلق از گزند یکدگر ایمن نمیزیند
باور مدار این همه در مور و مار وصل
халқ аз газнад йакадагар айаман нами-зинд
бовар мадор ин ҳама дар мур ва мор васал
بیدل به زور راست نیاید موافقت
عضو بریده راست بریدن دوبار وصل
бидел ба зур рост ниойд мавофақат
ъазу барида рост баридан дубор васал
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- بهار
- فصلِ شکوفایی؛ نمادِ جوانی، تازگی و جلوهٔ حسن.
- سنگ
- تختهسنگِ سخت؛ نمادِ سختی، جفا و گاه مستی.
- مژگان
- موهای پلک؛ نمادِ تیرِ نگاه و گریهٔ عاشق.
- سعی
- کوشش و تلاش؛ جهدِ سالک در راهِ مقصود.
- خواب
- خفتن و رؤیا؛ نشانهٔ غفلت در برابرِ بیداریِ دل.
- هیچ
- بودِ تهی و بیاعتبار؛ نشان نفی خود یا جهان گذرا.
- شیشه
- ظرفِ بلورین؛ نمادِ شکنندگیِ دل و صفای جان.
- خلق
- مردمان یا خوی و سرشت؛ جهانِ کثرت در برابرِ تنهایی.
- شوخی
- چالاکی و دلربایی؛ طنّازی و جلوهگریِ پرشورِ معشوق.
- فکر
- اندیشه؛ تأمل و سیرِ ذهن، گاه دامِ راهِ دل.
- ننگ
- عار و رسوایی؛ بدنامیِ عاشق که گاه مایهٔ افتخار است.
- جام
- ظرفِ باده؛ نمادِ دلِ پذیرای فیض و معرفت.
- نام
- نام و آوازه؛ نمادِ اعتبارِ ظاهری در برابرِ گمنامی.
- آغوش
- کنار و بغل؛ نمادِ وصال و پذیرشِ مهرآمیز.
- تغافل
- خود را به بیخبری زدن؛ نازِ معشوق در نادیدهگرفتنِ عاشق.
- انتظار
- چشمبهراهی؛ نمادِ کشش و رنجِ عاشق در فراق.