شب از یاد خطت سر رشتهٔ جان بود در دستم
شب از یاد خطت سر رشتهٔ جان بود در دستم
ز موج گل رگ خواب گلستان بود در دستم
шаб аз йод хатат сар рашта ҷон буд дар дастам
з мавҷ гул раг хоб галастон буд дар дастам
به غارت رفتهام تا ازکفم رفتهست گیرایی
چو بوی گل نمیدانم چه دامان بود در دستم
ба ғорт рафта-ам то азакафам рафта-ст гиройай
чу бавай-гул нами-донам ча домон буд дар дастам
فراهم تا نمودم تار و پود کسوت هستی
به رنگ غنچه یک چاکگریبان بود در دستم
фароҳам то намудам тор ва пуд касут ҳастӣ
ба ранг ғанача як чок-гарибон буд дар дастам
کف پایی نیفشاندم به عرض دستگاه خود
وگر نه یک جهان امید سامان بود در دستم
каф пойай нифашонадам ба ъарз дастаго худ
вагар на як ҷаҳон амид сомон буд дар дастам
نفس در دل گره کردم به ناموس وفا ور نه
کلید نالهٔ چندین نیستان بود در دستم
нафас дар дил гара кардам ба номус вафо вар на
калид нола чандин нистон буд дар дастам
سواد عجز روشنکردم و درس دعا خواندم
درین مکتب همین یک خط شبخوان بود در دستم
савод ъаҷаз рушан-кардам ва дарс даъо хонадам
дарин мактаб ҳамин як хт шабахон буд дар дастам
ز جنس گوهر نایاب مطلب هر چه گم کردم
کف افسوس فرصت نقد تاوان بود در دستم
з ҷанас-гуҳар нойоб маталаб ҳар ча гам кардам
каф афасус фарсат нақад товон буд дар дастам
پر افشانی ز موج گوهرم صورت نمیبندد
سر این رشته تا بودم پریشان بود در دستم
пур афашони з мавҷ-гуҳарм сурт нами-бандад
сар ин рашта то будам паришон буд дар дастам
سواد دشت امکان داشت بوی چین گیسویی
اگر نه دامن خود هم چه امکان بود در دستم
савод дашт амакон дошт бавай чин-гисавайай
агар на доман худ ҳам ча амакон буд дар дастам
به سعی نارسایی قطع امید از جهانکردم
تهی دستی همان شمشیر عریان بود در دستم
ба саъи норсойай қатаъ амид аз ҷаҳон-кардам
таҳи дасти ҳамон шамашир ъарион буд дар дастам
چو صبح ازکسوت هستی نبردم صرفهٔ چاکی
چه سازم جیب فرصت دامن افشان بود در دستم
чу субҳ азакасут ҳастӣ набардам сарфа чоки
ча созм ҷиб фарсат доман афашон буд дар дастам
شبم آمد به کف بیدل حضور دامن وصلی
که ناخن هم ز شوقش چشم حیران بود در دستم
шабам омад ба-каф бидел ҳазур доман васали
ки нохан ҳам з шуқаш чашм ҳирон буд дар дастам
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- گل
- شکوفهٔ خوشبو؛ نشانهٔ زیبایی، بهار و معشوق.
- پر
- شهپرِ پرنده؛ نمادِ پرواز، آرزو و سبکباریِ روح.
- هستی
- وجود و بودن؛ در برابر عدم و نیستی.
- موج
- برآمدگی آب؛ در شعر نشانه جنبش، اضطراب و ناپایداری.
- جهان
- گیتی و دنیا؛ سرای گذرا و فریبندهٔ هستی.
- ناله
- فریادِ دردمندانه؛ آوای سوز و شکوهٔ عاشق.
- دامن
- کنارهٔ جامه؛ نمادِ پاکی، پناه و دستآویز.
- صبح
- آغاز روشنایی پس از شب؛ نشانه امید، گشودگی یا بیداری.
- سعی
- کوشش و تلاش؛ جهدِ سالک در راهِ مقصود.
- خط
- موی نورُستهٔ گونه؛ نمادِ زیباییِ نوخیزِ معشوق.
- عجز
- ناتوانی و درماندگی؛ فروتنیِ بنده در برابرِ حق.
- عرض
- ویژگی ناپایدار شیء؛ در برابر جوهر و ذات.