چو شمع هیچکس به زیانم نمیکشد
چو شمع هیچکس به زیانم نمیکشد
در خاک و خون به غیر زبانم نمیکشد
чу шамъ ҳичакас ба зионам нами-кашад
дар хок ва хон ба ғир забонам нами-кашад
دارد به عرصهگاه هوس هرزهتاز حرص
دست شکستهای که عنانم نمیکشد
дорад ба ъарса-го ҳус ҳарза-тоз ҳарс
даст шакаста-эй ки ъанонам нами-кашад
سیرشکبشهرنگی من کم زسرمه نیست
عبرت چرا به چشم بتانم نمیکشد
сирашакабаша-ранги ман-кам засарма нест
ъабарт чаро ба чашм батонам нами-кашад
تصوبر خودفروشی لبهای خامشم
جز تخته هیچ جنس دکانم نمیکشد
тасубар ходафаруши лабҳой хомашм
ҷуз тахта ҳич ҷанас даконам нами-кашад
ناگفته به حدیث جفای پریرخان
این شکوه تا به مهر دهانم نمیکشد
ногафта ба ҳадис ҷафой пари-рхон
ин шакуа то ба маҳар даҳонам нами-кашад
شمشیر برق جوهر آهم ولی چه سود
از خودگذشتنی به فسانم نمیکشد
шамашир барақ ҷуҳар оҳам вали ча суд
аз ходагазаштани ба фасонам нами-кашад
شهرت نواست ساز زمینگیریام چو شمع
هرچند خار پا به سنانم نمیکشد
шаҳарт навост соз змингири-ам чу шамъ
ҳарачанд хор по ба санонам нами-кашад
مشت خسی ستمکش یأسم که موج هم
از ننگ ناکسی به کرانم نمیکشد
машт хаси сатамакаш йосам ки мавҷ ҳам
аз нанг нокаси ба-каронам нами-кашад
در پردهٔ ترنگ، پریخیز نغمهایست
دل جز به کوی شیشه گرانم نمیکشد
дар парда тарнаг, пари-хиз нағама-эй-ст
дил ҷуз ба-кавай шиша-гаронам нами-кашад
چون تیشه پیکر خم من طاقتآزماست
مفت مصوری که کمانم نمیکشد
чун тиша пикар хам ман тоқат-озмост
мафт масури-ки камонам нами-кашад
رخت شرار جسته ندانم کجا برم
دوش امید بار گرانم نمیکشد
рахт шарор ҷаста ндонам-каҷо барм
душ амид бор гаронам нами-кашад
بیدل ز ننگ طینت بیکار سوختم
افسوس دست من ز حنا نم نمیکشد
бидел з нанг тинат бикор сухатам
афасус даст ман з ҳано нам нами-кашад
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- پا
- عضوِ راهرفتن؛ نمادِ گام در راهِ طلب و سلوک.
- دست
- اندامِ گرفتن؛ نمادِ قدرت، بخشش و تصرف.
- موج
- برآمدگی آب؛ در شعر نشانه جنبش، اضطراب و ناپایداری.
- خون
- مایعِ سرخِ تن؛ نمادِ درد، شور و جگرسوزیِ عشق.
- هوس
- آرزوی زودگذر؛ میلِ نفسانی در برابرِ عشقِ راستین.
- ساز
- آلتِ نوازندگی؛ نمادِ همآهنگی و نوای درون.
- جوهر
- ذات و بنیاد شیء؛ چیزی که قائم به خود دانسته میشود.
- هیچ
- بودِ تهی و بیاعتبار؛ نشان نفی خود یا جهان گذرا.
- شیشه
- ظرفِ بلورین؛ نمادِ شکنندگیِ دل و صفای جان.
- خم
- خمیدگی یا خمِ شراب؛ منبعِ مستی و فیضِ معنوی.
- امید
- چشمداشتِ خیر؛ نورِ دل در برابرِ نومیدی و رجای وصل.
- پرده
- حجاب و پوشش؛ مانع آشکارشدن یا نشانه پنهانی راز.