خودسر به مرک گردن دعوی فرود کرد
خودسر به مرک گردن دعوی فرود کرد
چون سر نماند شمع قبول سجود کرد
ходасар ба марак гардан даъавай фаруд кард
чун сар намонд шамъ қабул саҷуд кард
در سعی بذل کوش که اینجا خسیس هم
جان دادنش به حسرت جاوید جود کرد
дар саъи базал-куш ки инҷо хасис ҳам
ҷон доданаш ба ҳасарт ҷовайд ҷуд кард
زان غنچهٔ خموش به آهنگکاف و نون
سر زد تبسمی که عدم را وجود کرد
зон ғанача хамуш ба оҳанг-коф ва нун
сар зд табасами-ки ъадам ро ваҷуд кард
چندان خمار درد محبت نداشتم
بوی گلی که زخم مرا مشکسود کرد
чандон хамор дард муҳаббат ндошатам
бавай гали ки захам маро машак-суд кард
ای چرخ زحمت گره کار من مبر
خواهد مه نوت سر ناخنکبود کرد
эй чарх заҳамат гара кор ман мабар
хоҳад ма нут сар нохан-кабуд-кард
آیینهدار نقش قدم بود هستیام
هرکس نظر فکند به من سرفرودکرد
оина-дор нақш қадам буд ҳастӣ-ам
ҳаракас назар факанд ба ман сарфарудакард
شد آبیار مزرع امکان گداز من
زین انجمن زیان زدهای شمع سودکرد
шуд обиор мазараъ амакон гадоз ман
зин анаҷаман зион зда-эй шамъ судакард
خونم به دل ز بویگلش میدرد نقاب
رنگ آتشی که داشت درین غنچه دود کرد
хонам ба дил з бавай-галаш мӣ-дард нқоб
ранг оташи-ки дошт дарин ғанача дуд кард
تا انتظار صبح قیامت امان کراست
کار درنگ ما نفس سرد زود کرد
то анатазор субҳ қиёмат амон карост
кор дарнаг мо нафас сард зуд кард
هرکس به هرچه ساخت غنیمت شمرد وبس
یاس دوام، نوحهٔ ما را سرودکرد
ҳаракас ба ҳарача сохт ғанимат шмард вабас
йос давом, нуҳа мо ро сарудакард
بیدل کتاب طالع نظاره خواندهایم
مژگان هبوط داشت، تحیر صعود کرد
бидел ктоб толаъ назора хонда-айам
мажагон ҳабут дошт, таҳир саъуд кард
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- آیینه
- شیشهٔ بازتابدهنده؛ نمادِ صفای دل و تجلّیِ حق.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- هستی
- وجود و بودن؛ در برابر عدم و نیستی.
- نقش
- تصویر و اثر؛ گاه صورت ظاهری در برابر حقیقت.
- صبح
- آغاز روشنایی پس از شب؛ نشانه امید، گشودگی یا بیداری.
- مژگان
- موهای پلک؛ نمادِ تیرِ نگاه و گریهٔ عاشق.
- سعی
- کوشش و تلاش؛ جهدِ سالک در راهِ مقصود.
- عدم
- نیستی؛ نبودن در برابر هستی و گاه مرتبه پیش از ظهور.
- نظر
- نگاه و دیدن؛ توجهِ معشوق یا بصیرتِ باطن.
- قدم
- پا یا گام؛ نشانهٔ آمدن، حضور و سلوکِ راهِ معنا.
- درد
- رنج و الم؛ سرمایهٔ عاشق و راهِ پختگیِ جان.
- حسرت
- افسوس و دریغ؛ اندوهِ ناکامی و آرزوی برنیامده.
- غنچه
- گُلِ نشکفته؛ نمادِ دلِ بسته، رازِ نهفته و دهانِ خاموش.