گر چنین بالد ز طوف دامنت اجزای ما
گر چنین بالد ز طوف دامنت اجزای ما
بر سر ما سایه خواهد کرد سر تا پای ما
гар чанин болд з туф доманат аҷазой мо
бар сар мо сойа хоҳадакард сарто пой мо
بینفس در ظلمتآباد عدم خوابیدهایم
شانه زنگیسو، سحر انشاکن از شبهایما
бе-нафас дар залмат-обод ъадам хобида-айам
шона зн-гису, саҳар анашокан аз шабҳой-мо
جهد ما مصروفیک سیرگریبان است وبس
غیر اینگرداب موجی نیست در دریای ما
ҷаҳад мо масаруф-як сирагарибон аст вабас
ғир ин-гардоб муҷи нест дар дариой мо
برتن ما هیچ نتوان دوخت جز آزادگی
گرهمه سوزن دمد چون سروازاعضای ما
бартан мо ҳич натавон духт ҷуз озодаги
гараҳама сузн дамад чун саравозоъазой мо
ماجرای بوی گل نشنیده میباید شنید
ای هوستن زن، زبانغنچه است انشای ما
моҷарой бавай-гул нашанида мӣ-бойд шанид
эй ҳус-тан зн, забон-ғанача аст анашой мо
رنگی ازگلزار بیرنگی برون جوشیدهایم
از خرابات پری می میکشد مینای ما
ранги азагалазор биранги барун ҷушида-айам
аз харобот пари мӣ мӣ-кашад миной мо
یار در آغوش و سیر کعبه و دیر آرزوست
تا کجا رفتهست از خود شوق بیپروای ما
йор дар оғуш ва сир каъаба ва дир орзуст
то каҷо рафта-ст аз худ шуқ бе-паравой мо
سعیهمت را ز بیمغزان چه مقدار آفتاست
هرکه را گردید سر، برلغزشی زد پای ما
саъи-ҳамат ро з бе-мағазон ча мақадор офт-аст
ҳарака ро гардид сар, баралағазаши зд пой мо
دل مصفاکن، سراز وستعگه مشرب برآر
آینهصیقل زدن سیریست در صحرای ما
дил масафокан, сароз вастаъага машараб барор
оина-сиқал задан сири-ст дар саҳарой мо
ششجهتهنگامهٔ امکان ز نفی ماپر است
رفتن از خود تا کجا خالی نماید جای ما
шашаҷаҳат-ҳангома амакон з нафи мопар аст
рафтан аз худ то каҷо холи намойд ҷой мо
یک نفس بیدل سری باید نیاز جیب کرد
غیر مجنون نیستکس در خیمهٔ لیلای ما
як нафас бидел сари бойд ниоз ҷиб-кард
ғир маҷанун нест-кас дар хима лилой мо
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- آینه
- سطح بازتابنده؛ در شعر نماد خودشناسی، صفا و جلوه است.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- گل
- شکوفهٔ خوشبو؛ نشانهٔ زیبایی، بهار و معشوق.
- هوس
- آرزوی زودگذر؛ میلِ نفسانی در برابرِ عشقِ راستین.
- سایه
- اثر تاریک در برابر نور؛ کنایه از ناپایداری، پیروی یا وجود کمرنگ.
- سعی
- کوشش و تلاش؛ جهدِ سالک در راهِ مقصود.
- پای
- عضوِ ایستادن و رفتن؛ نمادِ ثبات و گام در راه.
- عدم
- نیستی؛ نبودن در برابر هستی و گاه مرتبه پیش از ظهور.
- سحر
- سپیدهدم؛ زمان گشایش، دعا، بیداری و تغییر حال.
- زبان
- عضوِ گفتار؛ ابزارِ بیان و گاه حجابِ معنای نهفته.
- شوق
- اشتیاقِ سوزان؛ کششِ پرشورِ دل بهسوی معشوق و وصال.
- سیر
- گشت و سفر؛ سلوک و سیرِ معنویِ جان در راهِ حق.
- هیچ
- بودِ تهی و بیاعتبار؛ نشان نفی خود یا جهان گذرا.
- غنچه
- گُلِ نشکفته؛ نمادِ دلِ بسته، رازِ نهفته و دهانِ خاموش.