ز علم و عمل نکتهها گوش کردم
ز علم و عمل نکتهها گوش کردم
ندانم چه خواندم فراموش کردم
з ъалм ва ъамал накта-ҳо гуш-кардам
ндонам ча хонадам фаромуш кардам
خطوط هوس داشت اوراق امکان
مژه لغزشی خورد مغشوش کردم
хтут ҳус дошт авароқ амакон
мажа лағазаши хурд мағашуш-кардам
گر این انفعال است در کسب دانش
جنون بود کاری که با هوش کردم
гар ин анафаъол аст дар касаб донаш
ҷанун буд кори ки бо ҳуш кардам
اثر تشنهکام سنان بود و خنجر
چو حرف وفا سیر صد گوش کردم
асар ташана-ком санон буд ва ханҷар
чу ҳарф вафо сир сад гуш-кардам
نقاب افکنم تا بر اعمال باطل
جبینی ز خجلت عرق پوشکردم
нқоб афаканам то бар аъамол ботал
ҷабини з хаҷалат ъарақ пуш-кардам
بجز سوختن شمع رنگی ندارد
تماشای امشب همان دوش کردم
баҷаз сухатан шамъ ранги надорад
тамошой амашаб ҳамон душ кардам
جنون هزار انجمن بود هستی
نفسها زدم شمع خاموش کردم
ҷанун ҳазор анаҷаман буд ҳастӣ
нафасаҳо задам шамъ хомуш кардам
به یک آبله رستم از صد تردد
کشیدم ز پا پوست پاپوش کردم
ба як обала растам аз сад тардад
кашидам з по пуст попуш-кардам
بس است اینقدر همت میکشیها
که پیمانه پُرگشت و من نوشکردم
бас аст айанқадар ҳамат микашиҳо
ки пимона пурагашт ва ман нуш-кардам
ز قد دو تا یادم آمد وصالش
شدم پیر کاین طرح آغوش کردم
з қад ду то йодам омад васолаш
шадам пир койан тараҳ оғуш кардам
اگر بار هستی گران نیست بیدل
خمیدن چرا زحمت دوش کردم
агар бор ҳастӣ гарон нест бидел
хамидан чаро заҳамат душ-кардам
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- نیست
- نبودن؛ در شعر یادکرد عدم و فنا در برابر هستی موهوم.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- پا
- عضوِ راهرفتن؛ نمادِ گام در راهِ طلب و سلوک.
- هستی
- وجود و بودن؛ در برابر عدم و نیستی.
- هوس
- آرزوی زودگذر؛ میلِ نفسانی در برابرِ عشقِ راستین.
- جنون
- دیوانگی؛ شیداییِ عاشقانه و رهاییِ از عقل.
- عرق
- تراوشِ پوست؛ نمادِ شرم، خجلت و لطافتِ رخسار.
- مژه
- موی پلکِ چشم؛ تیرِ نگاه و ابزارِ گریه و خونِ دل.
- آبله
- تاولِ پا یا دانهٔ پوست؛ نشانهٔ رنجِ راه و سلوک.
- سیر
- گشت و سفر؛ سلوک و سیرِ معنویِ جان در راهِ حق.
- امکان
- جهان ممکنات؛ هرچه وجودش وابسته و نه ضروری است.
- اثر
- نشان و تأثیر؛ ردِّ برجامانده، که گاه نایاب و بیاثر است.
- انجمن
- مجلس و گردِهمایی؛ نمادِ محفلِ انس و جمعِ یاران.
- خجلت
- شرم و سرافکندگی؛ نمادِ حیای سالک در برابرِ حق.
- آغوش
- کنار و بغل؛ نمادِ وصال و پذیرشِ مهرآمیز.
- حرف
- سخن و کلمه؛ نمادِ گفتار در برابرِ خاموشیِ معنا.
- وفا
- پایداری در پیمان؛ نمادِ ثباتِ عشق و صدقِ یار.