ز گفت و گو نیامد صیدِ جمعیت به بند ما
ز گفت و گو نیامد صیدِ جمعیت به بند ما
مگر از سعیِ خاموشی نفس گیرد کمند ما
з гафт-вагу ниомад сиди ҷамаъит ба банд мо
магар аз саъи хомуши нафас-гирд каманд мо
اگر از خاکِ ره تا سایه فرقی میتوان کردن
جز این مقدار نتوان یافت از پست و بلند ما
агар аз хок ра то сойа фарақи митавон кардан
ҷуз ин мақадор натавон йофт аз паст ва баланд мо
ز سیرِ برقتازانِ شرر جولان چه میپرسی؟
که بود از خودگذشتن اولینگامِ سمند ما
з сир барақ-тозон шарар ҷавлон ча мӣ-парси?
ки буд аз ходагазаштан авалин-гом саманд мо
تو خواهی پرده رنگینساز و خواهی چهره گلگونکن
به هر آتش که باشد سوختندارد سپند ما
ту хоҳи парда рангин-соз ва хоҳи-чаҳара галагун-кан
ба ҳар оташ-ки бошад сухатан-дорад сапанд мо
از آن چشمِ عتابآلود ذوقِ زندگانی کو؟
غمِ باداممِ تلخی برد شیرینی ز قند ما
аз он чашм ъатоб-олуд зуқ зандагони-ку?
ғам бодомами талхи бард ширини з қанд мо
ز جوشِ باده میباید سراغ نشئه پرسیدن
همان نیرنگِ بیچونیست عرضِ چون و چند ما
з ҷуш бода мӣ-бойд сароғ нашиа парсидан
ҳамон-ниранг бичуни-ст ъарз чун ва чанд мо
اگر تا صانع از مصنوع راهی میتوان بردن
چرا دربندِ نقشِ ما نباشد نقشبند ما؟
агар то сонаъ аз масануъ роҳи мӣ-тавон бардан
чаро дарабанди нақш мо набошад нақашабанд мо?
چو شمع از جستجو رفتیم تا سر منزلِ داغی
تلاشِ نقشِ پایی داشت شبگیرِ بلند ما
чу шамъ аз ҷастаҷу рафтим то сар маназал доғи
талош нақш пойай дошт шабагири баланд мо
نگاهِ عبرتیم اما درین صحرای بیحاصل
حریفِ صیدِ گیرایی نمیگردد کمند ما
нго ъабартим амо дарин саҳарой бе-ҳосал
ҳарифи сиди гиройай нами-гардад каманд мо
نگردد هیچکافر محوِ افسونِ غلطبینی
غبارِ خویش شد در جلوهگاهت چشمبند ما
нагардад ҳич-кофар маҳу афасун ғалат-бини
ғубор хеш шуд дар ҷалуа-гоҳат чашм-банд мо
جهان توفان رنگ و دل همان مشتاق بیرنگی
چه سازد جلوه با آیینهٔ مشکلپسند ما
ҷаҳон туфон ранг ва дил ҳамон маштоқ биранги
ча созд ҷалуа бо оина машакал-пасанд мо
کمین نالهای داریم در گَردِ عدم بیدل
ز خاکستر صدای رفته میجوید سپند ما
камин нола-эй дорим дар гард ъадам бидел
з хокастар садой рафта мӣ-ҷавайд сапанд мо
واژهنامهٔ این غزل · 18 واژه
- دل
- جان و درونِ آدمی؛ جایگاهِ عشق، درد و آگاهی.
- بیدل
- تخلصِ شاعر؛ بهمعنیِ بیدل، عاشقِ از خود رفته.
- سر
- بالاترین عضوِ تن؛ نمادِ اندیشه، سودا و فدا شدن در عشق.
- نفس
- دم و لحظه کوتاه زندگی؛ گاه خواهش و خودی انسان.
- رنگ
- نمود و جلوه ظاهری؛ گاه کنایه از دگرگونی و ناپایداری.
- چشم
- اندامِ بینایی؛ سرچشمهٔ نگاه، اشک و انتظارِ عاشقانه.
- آیینه
- شیشهٔ بازتابدهنده؛ نمادِ صفای دل و تجلّیِ حق.
- خاک
- زمین و گرد؛ نماد فروتنی، فنا، خاستگاه جسم و نهایت آدمی.
- شمع
- چراغ مومی؛ نماد سوختن، روشنی دادن و عاشقی بیقرار.
- غبار
- گرد و خاک؛ نشانه محوی، فروتنی، ناپایداری یا حجاب دیدن.
- نقش
- تصویر و اثر؛ گاه صورت ظاهری در برابر حقیقت.
- جهان
- گیتی و دنیا؛ سرای گذرا و فریبندهٔ هستی.
- ناله
- فریادِ دردمندانه؛ آوای سوز و شکوهٔ عاشق.
- ساز
- آلتِ نوازندگی؛ نمادِ همآهنگی و نوای درون.
- آتش
- شعله و سوز؛ کنایه از عشق، درد، شور یا نابودی.
- سایه
- اثر تاریک در برابر نور؛ کنایه از ناپایداری، پیروی یا وجود کمرنگ.
- سعی
- کوشش و تلاش؛ جهدِ سالک در راهِ مقصود.
- گرد
- غبار و خاک؛ نشانه محوی، ناپایداری و حجاب دیدن.